Premanand Maharaj Biography In Hindi प्रेमानंद महाराज आज के समय बच्चे युवाओं और बुजरगो के लिए विश्व के अध्यात्मक गुरु बन चुके हैँ इनसे मिलने के लिए देश विदेश के नेता अभिनेता मिलने के लिए तरसते हैँ आज के समय भगवान के दर्शन करने हों तो आप वृन्दावन में आकर शाक्षात् प्रभु प्रेमानन्द जी के दर्शन कर सकते हों अगर आपने इनके दर्शन कर लिए तो मान लो आपने इस युग में भगवान के दर्शन लिए। प्रेमानन्द महाराज जी की राधा रानी के प्रति पूजा पाढ ही इनके लिए एक दिव्य सकती हैँ वो इसलिए की इनकी 2007 से इनकी दोनों किडनी फेल हैँ। और राधा रानी की कृपा की वजह से आज जबकि इनकी दोनी किडनी फेल हैँ और महाराज जी बिलकुल सवस्थ हैँ। ये राधा रानी की कृपा हैँ।
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| Premanand Maharaj Biography |
प्रेमानंद महाराज धर्म आध्यात्म और सत्संग की दुनिया में सम्मानित हस्तियों में से एक हैं. राधा कृष्ण के अनन्य भक्त प्रेमानंद महाराज का वृंदावन में श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम है. उनके देश दुनिया में लाखों भक्त हैं, जिनमें विराट कोहली, शिल्पा शेट्टी जैसे सेलेब्रिटी भी शामिल हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि प्रेमानंद जी महाराज का जन्म कहां और कब हुआ. वो कैसे धर्म आध्यात्म से जुड़े. प्रेमानंद महाराज का कनेक्शन कानपुर और वाराणसी से भी है और फिर उन्हें मथुरा वृंदावन में आकर आत्मिक शांति मिली. कभी शिव भक्ति में डूबे प्रेमानंद महाराज कैसे राधा कृष्ण के अनन्य उपासक बने. आइए आपको प्रेमानंद महाराज की आध्यात्मिक यात्रा की रोचक कहानी बताते हैं।
श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज: विस्तृत परिचय
| विषय (Attribute) | जानकारी (Details) |
|---|---|
| पूरा आध्यात्मिक नाम | श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज |
| जन्म का नाम | अनिरुद्ध कुमार पांडेय |
| जन्म तिथि | 30 मार्च, 1969 |
| जन्म स्थान | अखरी गांव, सरसौल ब्लॉक, कानपुर, उत्तर प्रदेश |
| माता-पिता | श्री शंभू पांडेय (पिता) और श्रीमती रमा देवी (माता) |
| संप्रदाय | राधावल्लभ संप्रदाय (श्री हित हरिवंश महाप्रभु) |
| गुरु दीक्षा | पूज्य श्री हित गौरंगी शरण जी महाराज (सहचरी भाव की दीक्षा) |
| संन्यास पूर्व नाम | स्वामी आनंदाश्रम (नैष्ठिक ब्रह्मचारी) |
| आश्रम/निवास | श्री हित राधा केली कुंज, वृंदावन परिक्रमा मार्ग, वराह घाट, मथुरा |
| दैनिक दिनचर्या (Routine) | रात्रि 2:00 बजे जागना, वृंदावन परिक्रमा, मंगल आरती, और सत्संग। |
| सत्संग का समय | प्रातः 4:15 बजे (लाइव प्रसारण भी उपलब्ध) |
| एकांतिक वार्तालाप | प्रतिदिन सुबह परिक्रमा के बाद चयनित भक्तों के प्रश्नों का उत्तर देना। |
| स्वास्थ्य चुनौती | पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (दोनों किडनी खराब, नियमित डायलिसिस के बावजूद पूर्ण सक्रिय)। |
| मुख्य संदेश | "नाम जप" (राधा नाम), ब्रह्मचर्य पालन, और हर परिस्थिति में भगवान का धन्यवाद करना। |
हमारे सबसे प्रिय सन्यासी राधावल्लभी संत, अनिरुद्ध कुमार पांडे प्रेमानंद जी महाराज का असली नाम हैँ महाराज जी का जन्म एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका पूरा परिवार भगवान के प्रति समर्पित रहा है। प्रेमानंद महाराज जी का जन्म स्थान सरसौल ब्लॉक, आखिरी गांव, कानपुर, उत्तर प्रदेश में सन 1972 में हुआ। महाराज जी ने अपने प्रवचनों में कई बार जिक्र किया है कि वह अपने प्रारंभिक जीवन में भगवान शिव के भक्त थे। वह भगवान शिव की शिक्षाओं का पालन किया करते थे। उन्होंने कभी भी आश्रम या पदानुक्रमित जीवन को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश जीवन अकेले और अन्य दिव्य संतों के साथ मिलकर बिताया। संत के रूप में बाबाजी ने कभी भी मौसम, भोजन, कपड़ो को लेकर किसी तरह की कोई परवाह नहीं की और वह हरिद्वार और वाराणसी के घाटों के आसपास ही रहा करते थे। वह हमेशा गंगा स्नान किया करते थे फिर चाहे वह कड़कड़ाती हुई ठंड ही क्यों न हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि महाराज जी को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त था, जो ज्ञान और करुणा की पराकाष्ठा थे।
प्रेमानंद महाराज घर परिवार की मोह माया से निकलने के बाद संन्यास के शुरुआती दौर में अत्यंत विचलित रहे. वो कुछ वक्त तक सरसौल के ही नंदेश्वर धाम में रहे. फिर भूख प्यास और भटकाव के बाद मोक्ष नगरी काशी पहुंचे. कहा जाता है कि यहीं गंगा किनारे स्नान ध्यान और तुलसी घाट पर पूजा अर्चना ही उनकी दिनचर्या बन गई. भीख में मिले भोजन से वो जिंदगी बिताने लगे. प्रेमानंद तुलसी घाट पर पीपल के वृक्ष के नीचे भगवान शिव की उपासना और तप में लीन रहते थे. वाराणसी में ही हनुमान संस्कृत महाविद्यालय में चैतन्य लीला और रासलीला देख वो भाव विभोर हो गए. यहीं से उनका हृदय राधा कृष्ण भक्ति के लिए हिलोरे मारने लगा. इसी बीच प्रेमानन्द महाराज वाराणसी से मथुरा वृंदावन आ गए।
फिलहाल प्रेमानंदजी महाराज श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम में रह रहे हैं। उन्होंने अपना जीवन राधा रानी की भक्ति सेवा के लिए समर्पित कर दिया हैँ प्रेमानंद महाराज रात्रिकाल में करीब 3 बजे छटीकरा रोड पर मौजूद श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी से रमणरेती क्षेत्र स्थित अपने आश्रम श्री हित राधा केलि कुंज जाते थे। करीब 2 किलोमीटर की इस पदयात्रा के दौरान महाराज की झलक पाने के लिए हजारों की तादाद में लोग सड़कों पर उमड़ पड़ते थे, परंतु स्वास्थ कारणों से यह क्रम रुक गया है। वे रोज वृंदावन की परिक्रमा करते थे, लेकिन अब नहीं करते हैं।
प्रेमानंदजी महाराज की दोनों किडनी कई सालों काम करना बंद कर दिया है। वो पूरे दिन डायलिसिस पर रहते हैं। इसके बावजूद वे रोज प्रवचन देते हैं और अपने सभी नित्य कर्म भी करते हैं। कई भक्त उन्हें किडनी डोनेट करना चाहते हैं परंतु उन्होंने मना कर दिया है। उन्होंने अपनी एक किडनी का नाम राधा और दूसरी का नाम कृष्ण रख लिया है
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